गुजरात हाई कोर्ट ने नारायण साई की उम्रकैद की सजा निलंबित करने की याचिका को अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने बताया कि साई ने अपील सुनवाई में सहयोग नहीं किया और रद्दी प्रक्रिया द्वारा देरी का विकल्प चुना है।

साई को 2013 में दायर एक यौन अपराध के मुकदमे में 2019 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। वह वर्तमान में सूरत जेल में बंद है। कोर्ट ने यह मानते हुए कहा कि सुनवाई में अनावश्यक विलंब का मुख्य कारण स्वयं साई के व्यवहार में है।

जज ने यह भी कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी पक्ष को देरी की रणनीति अपनाने का अधिकार नहीं है। इसलिए पिछली याचिका पर आज के निर्णय के साथ, साई को अपने मूल दोषसिद्धि के तहत ही रहना पड़ेगा।

नरायण साई की अपील के अगले चरण की सुनवाई 12 जून को निर्धारित की गई है। इस आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि सजा निलंबित नहीं की जाएगी और साई को मौजूदा जेल में ही रहना अनिवार्य है।

यह फैसला न्यायिक निरंतरता और दोषी के अधिकारों के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है, जिससे समान मामलों में डिटेन्शन पॉलिसी में स्पष्टता बनी रहेगी।