रायपुर में जनजाति सांस्कृतिक समागम के मंच से उठी डी-लिस्टिंग की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर पूर्व नेता अरविंद नेताम ने डी-लिस्टिंग का समर्थन करते हुए कहा कि यह बदलाव देर-सवेर होना तय है। वहीं UD मिंज ने इस मांग का विरोध जताया है। दोनों नेताओं के अलग-अलग रुख से इस मुद्दे पर चर्चा और बढ़ गई है। जनजातीय समुदाय से जुड़े संगठनों में भी इस विषय पर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ लोग इसे ऐतिहासिक सुधार मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे संवेदनशील मुद्दा बता रहे हैं। रायपुर में हुई चर्चा के बाद यह मामला राज्य स्तर पर भी तूल पकड़ रहा है। प्रशासन ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं दिया है। राजनीतिक हलकों में इस विषय पर बयानबाजी जारी है। Source: Source Post navigation पंजाब में चुनाव के दौरान पुलिस-बिट्टू बहस पर बवाल, आम आदमी पार्टी और भाजपा में तीखी बयानबाजी कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज: डीके शिवकुमार बन सकते हैं मुख्यमंत्री, सिद्धारमैया के इस्तीफे की चर्चा