अल नीनो और मानसून की अनिश्चितता ने छत्तीसगढ़ में कृषि संकट की चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने देश के 315 जिलों को खेती के लिए संवेदनशील माना है, जिसमें छत्तीसगढ़ के कई इलाके शामिल हैं। इस संभावित खतरे से निपटने के लिए साय सरकार ने किसानों को सतर्क रहने और मौसम के अनुरूप योजना बनाने की सलाह दी है। कृषि विभाग ने विशेष रूप से कम जलधारण क्षमता वाली और ऊंची जमीनों पर धान की जगह दलहन व तिलहन की खेती करने का सुझाव दिया है। सरकार का मानना है कि मानसून की कमी को देखते हुए फसल चक्र में बदलाव करना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है। राज्य प्रशासन किसानों को कम पानी वाली फसलों के लिए प्रोत्साहित कर रहा है ताकि नुकसान से बचा जा सके। विभाग के अधिकारियों ने खेतों में नमी बनाए रखने और जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। किसानों को बीज चयन से लेकर बुवाई तक की तकनीकी जानकारी दी जा रही है। भविष्य की इन चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने कृषि विशेषज्ञों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। यह कदम राज्य में खाद्य सुरक्षा और किसानों की आर्थिक स्थिति को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

Source: Source