परवेज खान (यमुनानगर) – यमुनानगर ज़िले की जगाधरी अनाज मंडी में गेहूँ की उठान और भुगतान को लेकर एक नया विवाद छिड़ गया है। मंडी के चेयरमैन और स्थानीय आड़ी एग्रीकल्चर एसोसिएशन (आढ़ती एसोसिएशन) के बीच आज तक चल रही इस टकराव ने न सिर्फ मंडी के संचालन में अड़चनें खड़ी कर दी हैं, बल्कि किसानों के मन में भी असंतोष की लहर दौड़ा रही है। **प्रमुख कारण और पृष्ठभूमि** जगाधरी मंडी, जो यमुनानगर के कृषि उत्पादन का एक मुख्य केंद्र है, प्रतिवर्ष लगभग 1.2 लाख टन गेहूँ का लेनदेन करती है। पिछले कई महीनों से इस मंडी में गेहूँ की उठान (उत्पादन) व भुगतान में देरी के कारण किसानों में बेचैनी बढ़ती जा रही है। इस पर मंडी के चेयरमैन, श्री राजेश कुमार (न्यायः), ने कहा कि “बाजार की मांग और सरकारी नियमन के कारण उठान के आंकड़ें नियत समय से नहीं मिल रहे हैं, इसलिए भुगतान में भी अस्थायी कठिनाई आ रही है”। दूसरी ओर, आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष, श्री रामपाल गुप्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलकर बताया कि “हमारे किसान लगातार अपना गतिशीलता खर्च, बीज, उखाड़ और खाद के खर्च उठाते हुए भी, मंडी की ओर से मिलने वाले भुगतान की राशि में कटौती देख रहे हैं। यह न केवल आर्थिक नुकसान का कारण है, बल्कि हमारे कृषि उत्पादन को भी रोकता है”। **संघर्ष का बिंदु** 1. **भुगतान में देरी** – मंडी के पास जमा हुए गेहूँ के निकासी के बाद सरकार से प्राप्त भुगतान में कई हफ़्तों की देरी हो रही है। इससे किसान लगातार उधार लेकर खेती जारी रख रहे हैं। 2. **उठान की मात्रा पर मतभेद** – चेयरमैन का मानना है कि उठान की मात्रा मौसमी उतार-चढ़ाव के कारण बदलती रहती है, जबकि एसोसिएशन का कहना है कि मंडी को राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम उठान स्तर को पूरा करना चाहिए। 3. **राजनीतिक हेरफेर का आरोप** – एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि मंडी के प्रबंधन में राजनीतिक हस्तक्षेप हो रहा है, जिससे कुशलता से काम नहीं हो पा रहा है। चेयरमैन ने इन आरोपों को सख्त शब्दों में खारिज किया और कहा कि “हमारी सभी कार्यवाही सरकारी नियमों और स्वीकृत योजनाओं के अनुरूप ही चलती है”। **स्थानीय प्रतिक्रिया** जगाधरी के कई किसान इस विवाद का सीधा असर महसूस कर रहे हैं। गुप्ता के सहयोगी, किसान श्याम सिंह ने कहा, “हर बार जब हम अपने फसल को मंडी में लाते हैं, हमें फॉर्म भरने, स्थानीय एजेंटों से मिलकर कागज़ी काम करने में दो‑तीन दिन लगते हैं। फिर भुगतान मिलने में महीनों का इंतज़ार करना पड़ता है। इससे हमारा कर्ज बढ़ता ही जा रहा है”। एक और किसान, सुश्री अुर्मिला देवी, ने कहा कि “यदि मंडी में इस तरह की अनियमितताएँ जारी रहती हैं, तो हमें वैकल्पिक बाजारों की ओर रुख करना पड़ेगा, जो हमारे लिए आर्थिक रूप से नहीं हो सकता”। **सरकारी हस्तक्षेप** जिला कृषि अधिकारी, श्री अनिल मिश्रा ने विवाद को सुलझाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “हम सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए एक विशेष उपसमिति बना रहे हैं। इस उपसमिति में मंडी के चेयरमैन, एग्रीकल्चर एसोसिएशन के प्रतिनिधि और जिला अधिकारी शामिल होंगे, जो इस मुद्दे को शीघ्र समाधान करेंगे”। वर्तमान में, मंडी में गेहूँ की उठान पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। लेकिन दोनों पक्षों ने कहा है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो किसान बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करेंगे, जिससे पूरे जिले की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। **आगे का रास्ता** उम्मीद है कि आगामी उपसमिति की बैठकों में नीति निर्माण, भुगतान प्रक्रिया की सरलीकरण और उठान के लक्ष्य को स्पष्ट किया जाएगा। साथ ही, किसानों को समय पर भुगतान और उचित समर्थन सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त कदम उठाने की माँग भी उठ रही है। जगाधरी मंडी में इस संघर्ष का समाधान न होने पर न केवल स्थानीय किसानों पर, बल्कि यमुनानगर के कुल कृषि उत्पादन एवं राज्य की खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर भी बड़ा असर पड़ सकता है। इस संदर्भ में क्षेत्रीय प्रशासन को तुरंत कार्यवाही करके इस जटिल मुद्दे को सुलझाना आवश्यक है। Post navigation EPFO का नया पोर्टल: पैसे निकालना होगा आसान, जानें पूरी जानकारी प्रशासन के आश्वासन पर समाप्त हुआ 7‑दिन का गौरक्षा दल का धरना, रात्री सेवा टीम के तैनाती का निर्णय