छत्तीसगढ़ के जांजगीर स्थित कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र के पुस्तकालय में नवीन पुस्तकों की एक आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य डिजिटल युग में विद्यार्थियों में अध्ययन संस्कृति को पुनर्जीवित करना था। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एपी अग्रवाल ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय किसी भी शैक्षणिक संस्थान का हृदय और ज्ञान का प्रमुख केंद्र होता है। उनके अनुसार छात्रों के सर्वांगीण विकास में पुस्तकों की भूमिका इंटरनेट से भी अधिक महत्वपूर्ण है। डॉ. अग्रवाल ने विद्यार्थियों से नियमित पुस्तकालय का उपयोग करने और पढ़ने की आदत विकसित करने का आग्रह किया। प्रदर्शनी में कृषि विज्ञान, उद्यानिकी, पशुपालन, कृषि अभियांत्रिकी, कंप्यूटर, सामान्य ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी नवीनतम पुस्तकें रखी गईं। सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. रेखराज साहू ने ई-रिसोर्स, इंटरनेट सुविधा और संदर्भ सेवा जैसी आधुनिक सुविधाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनी स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था, जहां बड़ी संख्या में प्राध्यापक, अधिकारी और छात्र-छात्राएं पहुंचे। विद्यार्थियों ने नए पुस्तक संग्रह को बेहद उपयोगी बताया। उनका कहना था कि इससे उनके अध्ययन, शोध और करियर निर्माण में विशेष मदद मिलेगी। इस प्रदर्शनी ने शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान का सशक्त मंच प्रदान किया। Source: Source Post navigation हमर लक्ष्य योजना: गरीब लेकिन प्रतिभाशाली 51 छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए मिली आर्थिक मदद नारायणपुर का जीएनएम प्रशिक्षण केंद्र बना युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार का मजबूत माध्यम