अमेरिका का H-1B कार्यक्रम कंपनियों को विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। इस कार्यक्रम के तहत हर साल 65,000 सामान्य H-1B वीजा उपलब्ध होते हैं। अमेरिकी संस्थानों से उन्नत डिग्री हासिल करने वाले उम्मीदवारों के लिए अतिरिक्त 20,000 वीजा का प्रावधान है। H-1B वीजा आमतौर पर तीन से छह साल की अवधि के लिए मंजूर किए जाते हैं। प्रस्तावित 1,03,265 डॉलर शुल्क इस कार्यक्रम की लागत को काफी बढ़ा सकता है। इसका असर खास तौर पर उन भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है जो अमेरिकी कंपनियों में नौकरी पाने की योजना बना रहे हैं। भारतीय उम्मीदवार H-1B कार्यक्रम के प्रमुख लाभार्थियों में शामिल रहे हैं। इतना अधिक शुल्क नियोक्ताओं के लिए विदेशी कर्मचारियों को प्रायोजित करना महंगा बना सकता है। इससे कंपनियां H-1B उम्मीदवारों की भर्ती को लेकर अधिक सावधानी बरत सकती हैं। भारतीय छात्रों और तकनीकी पेशेवरों के लिए अमेरिकी नौकरी के अवसरों पर इसका असर पड़ने की आशंका है। प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में कंपनियों और उम्मीदवारों की वीजा रणनीति बदल सकती है। हालांकि, प्रस्ताव का वास्तविक प्रभाव इसके अंतिम स्वरूप और लागू होने की शर्तों पर निर्भर करेगा। भारतीय H-1B आकांक्षियों के लिए शुल्क संबंधी बदलाव एक महत्वपूर्ण चिंता बन सकते हैं।

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