डेटा सेंटरों की बिजली की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि के कारण प्राकृतिक गैस पावर प्लांट की लागत में पिछले दो वर्षों में लगभग दोगुनी वृद्धि देखी गई है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में नई गैस पॉवर प्लांट बनाने की लागत में 66% तक की बढ़ोतरी हुई है, जबकि निर्माण अवधि भी 23% अधिक लेकर अब 4 से 5 साल तक पहुँच गई है। इस त्वरित विस्तार की जड़ें डेटा-सेंटरों की ऊर्जा‑गहन कार्यक्षमता में हैं, जो क्लाउड सेवाओं, AI मॉडल प्रशिक्षण और बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग के लिये निरंतर और भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति की मांग करते हैं। इसके जवाब में ऊर्जा कंपनियों को तेज़ी से नई गैस‑आधारित सुविधाएँ स्थापित करनी पड़ रही हैं, जिससे निर्माण लागत और समय दोनों में इजाफा हो रहा है। इस परिदृश्य में, नीति निर्माताओं और निवेशकों को लागत नियंत्रण और पर्यावरणीय प्रभाव को संतुलित करने के लिए नई रणनीतियों की आवश्यकता होगी। Post navigation 2025 में उपभोक्ताओं ने सोशल मीडिया घोटालों से 2.1 बिलियन डॉलर का नुकसान उठाया, FTC ने उजागर किया यूरोप की अमेरिकी सॉफ़्टवेयर से हटने की पहल: कारण और दिशा