दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी कर रहे 186 कर्मचारियों की जांच की जाएगी। संबंधित कर्मचारियों को मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होकर परीक्षण कराना होगा। जांच राज्य मेडिकल बोर्ड या संभागीय मेडिकल बोर्ड के जरिए कराई जाएगी। सरकार ने इस प्रक्रिया के लिए जरूरी दिशा-निर्देश तय करने पर चर्चा की है। फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के जरिए सरकारी सेवा में नियुक्ति के मामलों की भी जांच होगी। समाज कल्याण और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त बैठक में इस मुद्दे की समीक्षा की गई। बैठक में दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और UDID कार्ड बनाने की प्रक्रिया आसान करने पर भी चर्चा हुई। दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष मेडिकल बोर्ड और जांच शिविर लगाने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी होने पर निजी क्षेत्र के चिकित्सकों की सेवाएं लेने पर भी विचार किया गया। ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए सरकारी अस्पतालों में अलग क्लीनिक या वार्ड बनाने पर चर्चा हुई। सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी के लिए पात्र लोगों को समय पर सरकारी सहायता देने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया। समाज कल्याण विभाग के नशामुक्ति केंद्रों के कामकाज की भी समीक्षा की गई। दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, भिक्षुक, ट्रांसजेंडर और नशे से पीड़ित लोगों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण पर भी सहमति बनी।

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