भास्कर न्यूज | जींद धरती पर जब भी धर्म की हानि हुई है तो भगवान ने अलग-अलग अवतार धारण कर धरती पर जन्म लिया है। धरती पर उनका जन्म धर्म की स्थापना के लिए होता है। भगवान राम ने रावण और कृष्ण ने कंस के वध के लिए धरती पर जन्म लिया था। यह कहना है कथा वाचक आचार्य युगल कृष्ण शास्त्री का। रविवार को वे अर्बन एस्टेट में स्थित अग्रवाल धर्मशाला में श्रीमद भागवत कथा का पाठ कर रहे थे। कथा के चौथे दिन भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। पंडाल में मौजूद श्रद्धालु कन्हैया लाल के भजनों में खूब झूमे। युगल कृष्ण शास्त्री ने कहा कि द्वापर युग में लोग राजा कंस के अत्याचार से दुखी थे। लोगों को कंस के आतंक से छुटकारा दिलाने के लिए भगवान कृष्ण ने उनकी ही बहन देवकी की कोख से जन्म लिया था। उस समय देवकी और वासुदेव कंस की कारागार में कैद थे। भगवान कृष्ण उनकी आठवीं संतान थे। कृष्ण के जन्म के समय कारागार के सभी पहरेदार सो गए थे और कारागार के दरवाजे स्वयं ही खुल गए थे। वासुदेव ने कृष्ण को एक पालने में रखकर यमुना नदी पार गोकुल पहुंचे। गोकुल में माता यशोदा ने कृष्ण का पालन-पोषण किया। भगवान कृष्ण ने बाल्यकाल में ही कंस का वध कर संसार को उनके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। कथा वाचक कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवान कृष्ण के स्मरण मात्र से ही हमारे दुखों का अंत होना शुरू हो जाता है। इस अवसर पर कौशल, सुनीता, प्रेमलता, सोम दत्त शास्त्री, पंडित हरीश शास्त्री आदि उपस्थित रहे। : Source Post navigation क्यूईटी यूजी 2026 परीक्षा स्थगित