धुरंधर के कराची के ल्यारी शहर की इमेज में पाकिस्तानी साहित्य का एक विदेशी आयाम है, जो धुरंधर के लोगों में अत्याचार का छल प्रचलित कर सकता है. कई समय पहले इसकी फिल्म ‘मेरा ल्यारी’ को रिलीज़ करके पाकिस्तानी अभिनेत्री फुस्स एक खास जवाब दिया है, जिसमें उनका मुख्य कारण धुरंधर के कठोर और अपहरणीय शहर के इतिहास है. फिल्म की प्रदर्शनी में थिएटर्स ने वीकेंड के दिनों में अपने आप में डिजास्टर होने का रूप धारण किया. इसलिए, सिलसिले में नए शोज की पहचान और फिल्म की क्रांति के साथ संबद्ध दुकानदारों और अन्य पाठकों में साकार हुई.

धुरंधर के लोगों की इमेज बनाए रखना गहरा विषय है, जो प्रश्नोत्तरी से पहले अपने दर्शकों के मुद्दों को देखते हुए ‘मेरा ल्यारी’ ने उनकी इस भूमिका को बढ़ावा दे दिया. साथ ही, फिल्म में धुरंधर के शहर की अलग-अलग इमेज के विरोधाभास प्रकट हुए हैं. बातचीतों से पता चलता है कि धुरंधर में डर, अपहरण और कठोरता से संबद्ध शहर का नाम लेकर पाकिस्तानी फिल्म बनाई गई है. यह भावनाओं में कठोरता के साथ, धुरंधर के शहर पर एक नए प्रकार का विचार लगाया गया है.

वीकेंड में फिल्म ‘मेरा ल्यारी’ के शोज में देखभाल से पहले, थिएटर्स में धुरंधर की कठोर इमेज और अपहरणीयता से ग्रसित होने का आवास हुआ. नई शोज की पैदा करने में संकट या डिजास्टर होने की चेहरे का दर्शन लगभग अधिकतर थिएटर में दिखाई दिया. पहले 22 टिकटों की हस्तक्षेप से यह फिल्म नए रूप से विचार के बजाए, अधिक प्रतिक्रिया में कदम उठने की तलाश कर रही है. फिल्म ‘मेरा ल्यारी’ का विचार धुरंधर की इतिहासकीय अवधारणा में बदलने के लिए आई है, जिसके प्रति समाज में वित्तीय और सामाजिक ढंग से गुजर रहा है.

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