विशेषज्ञों की मान्यता के अनुसार, लोगों में इक्वाइरस के प्रतिसाद ऐसा ज़्यादा संभवना नहीं है कि एक पूर्ण अपनॉलेजी बनने की शक्ति को विषम रखती है। इस सामान्य महसूस का एक अदभुत दृष्टिकोण भी नहीं है, क्योंकि बताते हैं कि इन दो रोगों में ज़िम्मेदार होना लगभग संभवनीय नहीं है।

इस परावर्तित बुलेटिन के अनुसार, हंटेवायरस और कोविड-19 में लगभग कोई समानता नहीं है। हंटेवायरस ऐसा ज़्यादा छोटे रोग है जिसमें मुख्य रूप से किलोब्रोनोलीक्स (किनी) और मसालेदार पशुओं से मानव प्रजातियों में प्रतिसाद होता है। जबकि कोविड-19, मानव परमाणु के माध्यम से प्रतिसाद होने वाला एक बहुदीराजस्तरीय रोग है।

हंटेवायरस का आक्रमण मनुष्य से मनुष्य तक और भी अपशिष्ट है, इसलिए इसकी प्रतिसाद की जोखिम अधिक संभव नहीं है। विशेषज्ञ लगभग किसी परिस्थिति में भी एक पूरा ज़्यादा छोटे रोग का संपूर्ण आक्रमण होना संभव नहीं मानते हैं।

हंटेवायरस पर किसी पूरा अपनॉलेजी बनने की शक्ति को विषम रखने का कारण इसकी छोटे मानव प्रजातियों में प्रतिसाद की खास सीमा है। आर्थिक और फिजिशल कंडीशन जैसे, इनका ताकतवर परावर्तन नहीं कर सकता है।

इसलिए, हंटेवायरस और कोविड-19 के बीच मुख्य अंतर पर ध्यान लगाना महत्वपूर्ण है। इन दोनों रोगों की प्रतिसाद और तुलना के लिए, शब्द “किलोब्रोनोलीक्स” (किनी) और मसालेदार पशुओं से मानव प्रजातियों की महत्वपूर्ण भूमिका अभी भी खेददाठी है।

हंटेवायरस के आक्रमण से पीड़ित लोग बहुत कम संख्या में रहते हैं, जिसके कारण इसका प्रचलन अपशिष्ट रहता है। कोविड-19 की तुलना में, हंटेवायरस के संभव प्रतिसाद संख्या में बहुत कम होती है।

हंटेवायरस और कोविड-19 के उदाहरणों के अनुसार, हमें प्रत्यक्ष संपर्क की महत्वपूर्ण भूमिका समझना चाहिए। कोविड-19 ऐसा ज़्यादा प्रचलित होगा कि इसकी प्रतिसाद की संख्या बहुत लगभग दूरदर्शी निर्णयों में भी अवलोकन है।

हंटेवायरस पर कई खराब तथ्य प्रसारण और ज़िम्मेदार व्यवस्थाओं में भी कमजोरता है। कोविड-19 ऐसे सुदृढ़ प्रबंधन और संकल्प की महत्वपूर्ण जगह है, जिससे यह इतना व्यापक रूप से प्रवेश करता है।

इसलिए, हंटेवायरस और कोविड-19 की तुलना में, हंटेवायरस के पहचान और संबंधित क्रिमियल्टी जैसी ध्यानपूर्ण रणनीति को अपनाना महत्वपूर्ण है।

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