दिल्ली के सत्य निकेतन में छात्रों की PG इमारत ढहने से बड़ा हादसा हुआ। शुरुआती जानकारी में बेसमेंट में जलभराव और चल रहे मरम्मत कार्य को हादसे से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों ने इमारत की संरचनात्मक कमजोरी की ओर भी इशारा किया है। बताया जा रहा है कि यह इमारत करीब चार दशक पुरानी थी। इमारत में पिलर की कमी और अतिरिक्त मंजिलों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कथित तौर पर किए गए मरम्मत कार्यों की वैधता की भी जांच की जा रही है। हादसे के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। राहत और बचाव अभियान में छात्रों और स्थानीय लोगों ने भी मदद की। लोगों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए बचाव दल का साथ दिया। घटना ने दिल्ली की पुरानी इमारतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भवनों की संरचनात्मक जांच और सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। विशेषज्ञों के अनुसार, पुरानी इमारतों में समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट जरूरी है। जांच पूरी होने के बाद ही इमारत गिरने की सटीक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

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