परंपरागत कृषि पद्धतियों को संरक्षित करने के लिए युवाओं के एक समूह ने ‘कृषि क्षेत्र पाठशाला’ नामक अनूठी पहल शुरू की है। यह पाठशाला आधुनिकता और रासायनिक खेती के बढ़ते चलन में पुरानी और जैविक तकनीकों को बचाने का काम करेगी। युवा किसानों और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर वे पारंपरिक बीजों, फसल चक्र और प्राकृतिक कीट नियंत्रण के तरीकों को साझा करेंगे। यह पहल उन क्षेत्रों में विशेष रूप से लाभकारी होगी जहां आधुनिक खेती ने मिट्टी और उपज को नुकसान पहुंचाया है। पाठशाला में प्रायोगिक प्रशिक्षण और खेतों में सीधे अध्ययन पर जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को सिंथेटिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित करना है। आयोजकों का मानना है कि बुजुर्ग किसानों का ज्ञान युवा पीढ़ी के लिए संजीवनी है। यह पाठशाला न सिर्फ फसल की पैदावार बढ़ाएगी, बल्कि पर्यावरण संतुलन भी बनाए रखेगी। पहले चरण में यह परियोजना कुछ चुनिंदा गांवों में शुरू की गई है। स्वयंसेवी शिक्षक और कृषि वैज्ञानिक बिना किसी शुल्क के इसमें भाग ले रहे हैं। इस पहल की स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों ने सराहना की है। आने वाले समय में इस पाठशाला को अन्य राज्यों में भी विस्तार देने की योजना है। यह आंदोलन साबित करता है कि युवा अपनी विरासत को जीवित रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। Source: Source Post navigation NEET परीक्षा को लेकर सरकार सतर्क, धर्मेंद्र प्रधान बोले- इस बार सुरक्षा और पारदर्शिता पर खास फोकस VITEEE 2026: तीसरे चरण की काउंसलिंग शुरू, 45,001 से 70,000 रैंक वाले छात्र कर सकते हैं आवेदन; यहाँ देखें पूरी डिटेल