पश्‍चिम गोदावारी में बिजली कटौती और डीजल सप्लाई की दिक्कत ने जलजीव (एक्वाकल्चर) उद्योग को कड़ी घात लगाई है। बागीचा और तालाबों में जलेबंद पंपों को चलाने के लिए जरूरी ईंधन न मिलने से मछलियों की जीवटता घट गई, कई प्रजनन केंद्रों ने उत्पादन में 30-45% तक की गिरावट दर्ज की है। किसानें कह रहे हैं कि लगातार होने वाले पावर ब्रेक और डीजल की कीमत में वृद्धि ने उन्हें आर्थिक नुकसान पहुँचा दिया है, जिससे स्थानीय रोजगार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। राज्य सरकार ने आपातकालीन उपायों की घोषणा की, जैसे वैकल्पिक सौर पावर सपोर्ट और डीजल की प्राथमिकता वितरण, परन्तु अभी तक प्रभावी समाधान नहीं दिख रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालीन योजना में सौर ऊर्जा, बायोमैस और जलसंधारण प्रणालियों को जोड़ना आवश्यक है, ताकि इस तरह की आपदाओं से बचाव हो सके और मछली पालन को सतत रूप से विकसित किया जा सके।

By AIAdmin

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