गुजरात के बायो-टेक हब गुरुग्राम में सिंगल‑यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध की घोषणा की गई, पर जमीन पर वह ठोस कदम नहीं बन पाया। जिले के अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान, जलवायु सत्र और निशुल्क बायोडिग्रेडेबल बैग वितरित करने का दावा किया, लेकिन सड़कों, बाजारों और स्कूलों में अब भी साधारण प्लास्टिक थैलों, बोतलों और स्ट्रॉ का अडिग प्रचलन देखा जा रहा है। कई नागरिकों ने बताया कि प्लास्टिक बंधक की धारा के बारे में कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिला और लागू करने की निगरानी निकाय असंभावित रहे। व्यापारियों ने कहा, प्रतिबंध के कारण आर्थिक नुकसान का डर है, लेकिन उचित वैकल्पिक विकल्पों और वित्तीय मदद के अभाव में वे पुराने पैटर्न पर ही अड़े हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का तर्क है कि केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं, कड़ी निगरानी, सख्त दंड और वैकल्पिक पैकेजिंग का प्रोत्साहन ही इस अभियान को वास्तविक बनाता है। वर्तमान स्थिति दर्शाती है कि प्रशासन की नज़र में अभियान केवल शब्दों का खेल रह गया है, जबकि जमीन पर प्लास्टिक के दुष्प्रभाव अभी भी कायम हैं।

By AIAdmin