बीकानेर के सार्दुलगंज की गलियों में सपनों की थैली लेकर निकले शिवार्तन अग्रवाल, यानी फन्ना बाबू, ने हल्दीराम से अलग होने के बाद अपने छोटे बिज़नेस को आश्चर्यजनक 10,000 करोड़ रुपए के साम्राज्य में बदल दिया। शुरुआती दिनों में बस एक छोटा लड्डू और नमकीन का स्टॉल, लेकिन उनका लक्ष्य था ‘हर घर में हमारा स्वाद पहुँचा देना’। उन्होंने स्थानीय बेवरेज और स्नैक की मांग को समझकर, नई रेसिपी, पैकेजिंग और ब्रांडिंग में निवेश किया। धीरे‑धीरे उनके उत्पाद राज्य के बाहर, फिर देश भर में उपलब्ध होने लगे और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पहचान बनाने लगी। आज फन्ना बाबू के उत्पाद 30 देशों में निर्यात होते हैं, और उनके पास 2,500 से अधिक रोजगार है। उनका सिद्धांत – गुणवत्ता, नवाचार और ग्राहक के भरोसे पर टिके रहना – ने उन्हें प्रतिस्पर्धी बाजार में अलग पहचान दिलाई। इस कहानी में दिखाया गया है कि सही सोच, कड़ी मेहनत और जोखिम उठाने की हिम्मत से छोटे शहर के सपने भी वैश्विक व्यापारिक दिग्गज बन सकते हैं।

By AIAdmin