हाईकोर्ट ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने के आरोपों की जांच के लिए समिति गठित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच पर जोर दिया। समिति कथित अनियमितताओं की जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। न्यायालय ने पारदर्शी जांच प्रक्रिया सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। रोजगार में फर्जी प्रमाणपत्रों के उपयोग को गंभीर मामला माना गया। जांच के दौरान सभी संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। अदालत ने प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मामले की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। यह आदेश भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Source: Source Post navigation डीए मामले के आरोपी वंशी मोहन को 60 दिन जेल में रहने के बाद मिली जमानत सहपाठी के अपहरण के आरोपी दो विधि छात्रों का निष्कासन बरकरार, मद्रास हाईकोर्ट ने दी मंजूरी