छत्तीसगढ़ के बाल सम्प्रेक्षण गृहों से किशोरों के फरार होने की घटनाओं पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। महासमुंद और बिलासपुर के बाल सम्प्रेक्षण गृहों से किशोरों के भागने के मामलों को अदालत ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने 156 सिक्योरिटी गार्ड की तैनाती के लिए वित्तीय सहायता को लेकर केंद्र से जवाब मांगा है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए अतिरिक्त गार्ड की जरूरत बताई गई है। राज्य सरकार ने बाल सम्प्रेक्षण गृहों में सुरक्षा ऑडिट कराने की जानकारी दी है। सरकार ने सुधार के लिए उठाए गए कई कदमों से भी अदालत को अवगत कराया है। कोर्ट सुरक्षा व्यवस्था में कमियों और बच्चों की निगरानी से जुड़े पहलुओं पर नजर रख रही है। मामले में केंद्र और राज्य सरकार के जवाब के बाद आगे की दिशा तय हो सकती है। अदालत का रुख बाल सम्प्रेक्षण गृहों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता को दर्शाता है। सुरक्षा बढ़ाने के साथ संस्थानों में सुधारात्मक कदम उठाने पर भी जोर दिया जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई में सुरक्षा और वित्तीय सहायता से जुड़े मुद्दों पर आगे चर्चा होगी।

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