दिल्ली के बाहर स्थित पल्लिकरन्नाई तालाब, जो शहर की सबसे बड़ी जलधारा में से एक है, अब बिखरते बिना उपचारित मलजल की लहरों से दबी हुई है। नगर निगम की ख़राब निचली पाइपलाइन और अवैध नाली जोडों के कारण सैकड़ों हजारों घन लीटर कच्चा मलजल हर दिन इस मौन ईकोसिस्टम में घुस रहा है। इससे जल की गुणवत्ता तेज़ी से गिर गई, वायु में दुर्गंध फैल गई और पक्षी, चिता, कछुए व जलजीवों की आबादी खतरे में पड़ गई। स्थानीय पर्यावरण समूहों ने चेतावनी दी है कि अगर तुरंत शुद्धिकरण सुविधाओं की स्थापना और निकासी मार्गों की सफाई नहीं की गई तो यह दलदल जलीय जीवन का अभयारण्य खो सकता है। नागरिकों ने भी जल प्रदूषण के खिलाफ आवाज़ उठाई और नगर निगम से अनुरोध किया है कि वे जल निकासी प्रणाली को सुधारें, रीयुसेबल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाएं और सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रम चलाएं। अधिकारी अभी तक ठोस कार्रवाई के लिए कोई स्पष्ट योजना नहीं बता पाए हैं, जिससे इस संकट का समाधान और भी चुनौतीपूर्ण बन गया है। Post navigation सिम्बायोसिस ने एशिया की पहली यूनेस्को चेयर ऑन जेंडर इन्क्लूजन और स्किल डेवलपमेंट की घोषणा की LANXESS ने भारत में नया लुब्रिकेंट एडिटिव्स कारखाना खोला, IOCL के साथ साझेदारी की