जितु ने अपनी बहीण के खाता में बचा 19,300 रुपये निकालने के लिए बैंक गया, पर शाखा प्रबंधक ने कहा कि खाता धारक की हाजिरी या न्यायिक दस्तावेज़ जरूरी है। पूरी कोशिश के बाद भी निराकरण नहीं मिला, तब जितु ने एक अजीब कदम उठाया। उसने अपनी बहीण की कब्र से हड्डियों को निकाला, उन्हें साफ-सुथरा करके बैग में भर लिया और सीधे बैंक में पहुंचा। अपने अत्यधिक दृढ़संकल्प के साथ वह खड़े होकर प्रबंधक से कहा, “अब मेरी बहीण यहाँ है, आप अपना काम करो।” इस अपरिचित दृश्य ने सभी को स्तब्ध कर दिया। अंततः, बैंक ने कानून के तहत उचित प्रक्रिया का पालन किया और रकम जारी नहीं की। यह घटना न केवल कानूनी जटिलताओं को उजागर करती है, बल्कि हद से ज्यादा साहस और अनजान उपायों की सीमा को भी प्रश्नचिह्न में डालती है।

By AIAdmin

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