भारत में अंग प्रत्यारोपण की जरूरत और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। हर साल करीब 2 लाख नए किडनी मरीज जुड़ रहे हैं। इसके मुकाबले देश में केवल करीब 14,500 किडनी ट्रांसप्लांट किए जा रहे हैं। यह आंकड़ा अंगों की मांग और उपलब्धता के बीच गंभीर असमानता को दर्शाता है। किडनी मरीजों की बढ़ती संख्या से प्रत्यारोपण की जरूरत लगातार बढ़ रही है। सीमित संख्या में उपलब्ध अंगों के कारण सभी जरूरतमंद मरीजों को समय पर ट्रांसप्लांट नहीं मिल पाता। अंगदान की कमी इस संकट की प्रमुख चुनौतियों में शामिल है। प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त अंग उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी कई स्तरों पर निर्भर करती है। स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बढ़ती मांग को पूरा करना बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार अंगदान को बढ़ावा देना इस अंतर को कम करने में मदद कर सकता है। जरूरतमंद मरीजों के लिए समय पर अंग उपलब्ध होना उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण है। देश में अंग प्रत्यारोपण की क्षमता बढ़ाने और अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। बढ़ता किडनी रोग और सीमित ट्रांसप्लांट संख्या भारत के अंग संकट की गंभीर तस्वीर पेश करती है। Source: Source Post navigation जब भारत में बनना असंभव माना गया पुर्जा, पंजाब के इंजीनियर ने 1984 में Hero Honda के लिए कर दिखाया कमाल IAF की ₹1 लाख करोड़ की बड़ी तैयारी, पुराने An-32 विमानों की जगह आएंगे 60 नए ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट