1930 के दशक में अमेरिका के दक्षिणी राज्यों में मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए कुडज़ू बेल बड़े पैमाने पर लगाई गई थी। शुरुआत में इसे पर्यावरण संरक्षण के लिए उपयोगी पौधा माना गया। समय के साथ यह बेल बेहद तेजी से फैलने लगी। इसकी अनियंत्रित वृद्धि ने सड़कों के किनारे, खेतों और खाली जमीनों को अपनी चपेट में ले लिया। कई स्थानों पर इसने स्थानीय वनस्पतियों को नुकसान पहुंचाया। तेजी से फैलने की वजह से इसे ‘द वाइन दैट एट द साउथ’ यानी दक्षिण को निगलने वाली बेल कहा जाने लगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह एक आक्रामक प्रजाति बन गई है। इसके नियंत्रण के लिए कई क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। यह उदाहरण बताता है कि किसी बाहरी प्रजाति को बड़े पैमाने पर लगाने से पहले उसके दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन करना कितना आवश्यक है। Source: Source Post navigation इंडोनेशिया दौरे का खास समापन: पीएम मोदी के विमान को फाइटर जेट्स ने दी विदाई स्विट्जरलैंड में नस्लभेद का सामना करने का दावा, वसुंधरा ओसवाल के बयान से छिड़ी बहस