दिल्ली हाई कोर्ट ने महिलाओं के पहनावे को लेकर की गई टिप्पणियों पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि किसी महिला के कपड़ों के आधार पर उसके चरित्र या आचरण का आकलन नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने महिलाओं के पहनावे को लेकर बनाई जाने वाली मानसिकता पर गंभीर आपत्ति जताई। अदालत के अनुसार ऐसी सोच स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने महिला की गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के सम्मान पर जोर दिया। किसी महिला के कपड़ों को उसके खिलाफ टिप्पणी या निष्कर्ष का आधार बनाना उचित नहीं है। अदालत की टिप्पणी महिलाओं के अधिकारों और सम्मान से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे को रेखांकित करती है। न्यायालय ने इस तरह की सोच को बदलने की आवश्यकता पर भी संकेत दिया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित टिप्पणियों को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया। कोर्ट ने कहा कि पहनावे के आधार पर महिलाओं के प्रति पूर्वाग्रह नहीं रखा जाना चाहिए। यह टिप्पणी लैंगिक समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के व्यापक सिद्धांतों से जुड़ी है। अदालत का रुख महिलाओं की गरिमा की रक्षा के महत्व को दर्शाता है। इस टिप्पणी को महिला अधिकारों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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