महाराष्ट्र के वसई क्षेत्र में सदियों पुराने पारंपरिक जलस्रोत ‘बावखाल’ तेजी से समाप्त होते जा रहे हैं। स्थानीय लोग इन ऐतिहासिक तालाबों को बचाने के लिए लगातार आवाज उठा रहे हैं। भूमि की बढ़ती कीमतों के कारण कई जलाशयों पर अवैध कब्जे और निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। इन तालाबों को भरकर आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं विकसित करने के आरोप लग रहे हैं। बावखाल वसई की पारंपरिक जल व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। ये जलस्रोत भूजल पुनर्भरण में अहम भूमिका निभाते हैं। स्थानीय जलापूर्ति और पर्यावरणीय संतुलन भी काफी हद तक इन पर निर्भर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन जलाशयों के खत्म होने से जल संकट और गंभीर हो सकता है। अतिक्रमण के कारण वर्षा जल के प्राकृतिक संचयन की क्षमता भी प्रभावित हो रही है। इससे क्षेत्र में पर्यावरणीय क्षरण की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय नागरिक और सामाजिक संगठन संरक्षण की मांग कर रहे हैं। वे प्रशासन से अवैध निर्माणों पर कार्रवाई और जलाशयों के पुनर्जीवन की अपील कर रहे हैं। यह संघर्ष केवल जलस्रोतों को बचाने का नहीं, बल्कि वसई की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का भी प्रयास है। Source: Source Post navigation रक्षा निर्यात में भारत की बड़ी छलांग, वियतनाम को ब्रह्मोस आपूर्ति, इंडोनेशिया समझौता अंतिम चरण में यूपी में सड़क हादसे में NIA के DSP की मौत, देश भर में फैला शोक