ओडिशा में दिव्यांगता प्रमाण पत्र और यूडीआईडी (UDID) कार्ड के लिए लंबित पड़े करीब 40,000 आवेदनों के निपटारे हेतु सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया है। राज्य के सामाजिक सुरक्षा और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (SSEPD) ने ‘स्टेट इंस्टीट्यूट फॉर एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज’ (SIEP) को अधिकृत चिकित्सा संस्थान के रूप में अधिसूचित करने की प्रक्रिया शुरू की है। वर्तमान में SIEP केवल 0-18 वर्ष की आयु के बच्चों का आकलन करता है, लेकिन नई मंजूरी के बाद यह संस्थान सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए दिव्यांगता मूल्यांकन करने में सक्षम होगा। SIEP में पहले से ही बहु-विषयक विशेषज्ञ और आधुनिक बुनियादी ढांचा मौजूद है, जिससे राज्य के दिव्यांगता प्रमाणन तंत्र को मजबूती मिलेगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मयूरभंज, बालासोर और गंजम जैसे जिलों में लंबित आवेदनों की संख्या सबसे अधिक है। यूडीआईडी परियोजना का मुख्य उद्देश्य सभी पात्र लाभार्थियों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाना है ताकि उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके। विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जिला स्तर पर हो रही देरी को कम करने के लिए यह एक प्रभावी कदम साबित होगा। स्वास्थ्य विभाग से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद, SIEP जल्द ही सभी प्रकार की दिव्यांगताओं के मूल्यांकन के लिए काम शुरू कर देगा। इस पहल से दिव्यांगजनों को बार-बार अस्पतालों के चक्कर लगाने और लंबी प्रतीक्षा से राहत मिलेगी। सरकार का प्रयास है कि पारदर्शी और त्वरित प्रक्रिया के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सहायता पहुंचाई जा सके। Source: Source Post navigation 45,000 साल पुराने अवशेषों ने बदली इतिहास की परिभाषा: यूरोप में आधुनिक मानव के आगमन का नया रहस्य कोरबा में पल्स पोलियो अभियान का आगाज: 1.72 लाख बच्चों को सुरक्षा कवच देने का लक्ष्य