विभागीय देरी के कारण किसी योग्य अधिकारी को पदोन्नति से वंचित नहीं किया जा सकता। हरियाणा पुलिस सेवा के अधिकारी राज कुमार वालिया के मामले में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की चंडीगढ़ बेंच ने यह स्पष्ट किया है। वर्ष 2022 की आईपीएस चयन सूची में दूसरा स्थान मिलने और संघ लोक सेवा आयोग से मंजूरी के बावजूद उन्हें आईपीएस नियुक्ति नहीं मिल पाई थी, क्योंकि चयन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही वह रिटायर हो गए थे। अब चंडीगढ़ कैट ने उन्हें बड़ी राहत देते हुए वर्ष 2022 के पैनल के अनुसार देय तिथि से आईपीएस कैडर में काल्पनिक नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं। अधिकरण ने केंद्र सरकार, यूपीएससी और संबंधित पक्षों को आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 4 हफ्ते के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी करने को कहा है। कैट ने माना कि यदि चयन प्रक्रिया समय पर पूरी की गई होती तो वालिया रिटायरमेंट से पहले ही आईपीएस अधिकारी बन सकते थे। प्रशासनिक देरी का खामियाजा किसी पात्र अधिकारी को नहीं भुगतना चाहिए। अधिकरण ने उनकी वास्तविक रिटायरमेंट और आईपीएस में नियुक्ति के बीच की अवधि को सतर्कता मंजूरी और अन्य जरूरी औपचारिकताओं के अधीन निरंतर सेवा मानने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्हें आईपीएस अधिकारियों के लिए निर्धारित रिटायरमेंट आयु तक सेवा संबंधी लाभ देने को कहा है। राज कुमार वालिया ने 26 फरवरी 1990 को हरियाणा पुलिस में सहायक उपनिरीक्षक के रूप में सेवा शुरू की थी और करीब 35 साल की सेवा के बाद 31 जनवरी 2026 को रिटायर हुए। उनकी दलील थी कि एक जनवरी 2022 की पात्रता तिथि पर वह सेवा में थे और आईपीएस में पदोन्नति के लिए निर्धारित सभी शर्तें पूरी करते थे। Source: Source Post navigation OBC क्रीमी लेयर विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने पुरानी नौकरियों और प्रमोशन को दी सुरक्षा, लंबित मामलों पर फैसला बाकी महिला 54 वर्ष की, पति आयु सीमा से कम: बॉम्बे हाई कोर्ट ने सरोगेसी की दी अनुमति, कहा- कानून का उद्देश्यपूर्ण अर्थ जरूरी