वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि कुछ बेलीन व्हेल कम आवृत्ति वाली ध्वनियों का उपयोग कर किलर व्हेल से बचाव करती हैं। इस रणनीति को ‘अकॉस्टिक क्रिप्सिस’ कहा जाता है। ब्लू व्हेल भी ऐसी आवृत्ति पर आवाज़ निकालती हैं जिसे किलर व्हेल सुन नहीं पाती। इससे वे खुले समुद्र में शिकारी की नजर और सुनने की क्षमता से काफी हद तक बच जाती हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह क्षमता लाखों वर्षों के प्राकृतिक चयन का परिणाम है। कम आवृत्ति वाली पुकारें व्हेल के जीवित रहने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। इस अध्ययन से व्हेल की संचार प्रणाली के विकास को समझने में नई जानकारी मिली है। शोध यह भी बताता है कि शिकारियों के दबाव ने समुद्री जीवों के व्यवहार को प्रभावित किया है। वैज्ञानिक इस खोज को समुद्री पारिस्थितिकी के अध्ययन में महत्वपूर्ण मान रहे हैं। यह अध्ययन व्हेल के विकास और उनकी अनुकूलन क्षमता पर नई रोशनी डालता है।

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