सत्य निकेतन में इमारत ढहने की दर्दनाक घटना ने छात्रों की आवासीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हादसे में पांच छात्रों की जान जाने की जानकारी सामने आई है। दिल्ली आने वाले छात्र बेहतर शिक्षा और भविष्य की तलाश में यहां रहते हैं। लेकिन कई छात्र बस्तियों में उन्हें असुरक्षित इमारतों का सामना करना पड़ता है। अनियंत्रित निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी इस समस्या को और गंभीर बनाती है। सत्य निकेतन की घटना किसी एक इलाके तक सीमित समस्या नहीं दिखाती। दिल्ली के कई छात्र इलाकों में इसी तरह के जोखिम मौजूद होने की चिंता जताई जा रही है। पुराना राजेंद्र नगर और सैदुलाजाब में हुई पिछली घटनाएं भी इस खतरे की ओर इशारा करती हैं। इन घटनाओं से भवनों की सुरक्षा जांच और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। छात्रों के लिए सुरक्षित और मानकों के अनुरूप आवास उपलब्ध कराना जरूरी है। प्रशासनिक स्तर पर निर्माण नियमों के पालन की निगरानी मजबूत करने की जरूरत है। हादसे ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। शिक्षा और करियर के लिए दिल्ली आने वाले युवाओं को सुरक्षित रहने की बुनियादी सुविधा मिलना जरूरी है।

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