2012 से मलि ने लगातार एक-एक राजनीतिक और सुरक्षा संकट का सामना किया है। 2012 में तालिबान-प्रेरित बंडियों और तेज़-टुहरे विद्रोहियों ने उत्तरी क्षेत्रों को कब्ज़ा किया, जिससे सैन्य तख्तापलट हुआ और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप का आह्वान किया गया। फ्रेंच ऑपरेशन सर्विसर ने इस उलझन को शांत करने की कोशिश की, पर असंतोष जारी रहा। 2020 में दो प्रमुख अधिकारी और राष्ट्रपति इब्राहिम बोगो बेके द्वारा दूसरा तख्तापलट किया गया, जिसका परिणाम 2021 में सेना प्रमुख अस्साने दोउसे के हाथों सत्ता का सुदृढ़ीकरण हुआ। आर्थिक समुदाय ऑफ वेस्ट अफ्रीका (ECOWAS) ने प्रतिबंध लगाए, पर डोसे ने संविधान में बदलाव कर साल 2023 तक सत्ता को वैध बना दिया। इसी बीच इस्लामिक घातक समूहों की हमले और सीमावर्ती लड़ाइयाँ नागरिकों की जान ले रही हैं, जबकि शांति वार्ताओं में टाल‑मटोल जारी है। इन घटनाओं ने मलि को एक समय के लोकतांत्रिक आशे के दीपक से एक निरंतर अस्थिरता की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।

By AIAdmin

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