छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी लैब को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। इस बदलाव के कारण सालों से सेवाएं दे रहे करीब 6 हजार मेडिकल लैब तकनीशियनों (एमएलटी) का भविष्य अधर में लटक गया है। चूंकि लैब सेवाओं के निजीकरण के बाद उनके मूल काम की आवश्यकता नहीं रहेगी, इसलिए स्वास्थ्य विभाग अब इन्हें दूसरे विभागों में स्थानांतरित करने की योजना बना रहा है। इन अनुभवी तकनीशियनों को आयुष्मान योजना, सीजीएमएससी में क्लर्क या फूड एंड ड्रग विभाग में सैंपल कलेक्टर जैसे गैर-तकनीकी पदों पर काम करने का विकल्प दिया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में चरणबद्ध तरीके से ‘हमर लैब’ बंद होने से तकनीशियनों की विशेषज्ञता का उपयोग खत्म होने की आशंका है। प्रतियोगी परीक्षाओं और कठिन प्रशिक्षण के जरिए भर्ती हुए ये कर्मचारी अपनी तकनीकी पहचान खोने के डर से चिंतित हैं। अभी तक अंतिम आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन विभाग और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच हुई चर्चा ने इस बदलाव की पुष्टि कर दी है। बरसों का अनुभव रखने वाले इन कर्मचारियों को क्लर्क या बाबू बनाने का प्रस्ताव स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यकुशलता और इन कुशल श्रमिकों के करियर पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। Source: Source Post navigation हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: 58 वर्ष की आयु पूरी कर चुके दिव्यांग कर्मचारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति रायपुर की संकरी गलियों में फंसी ‘जीवनरेखा’: 310 रास्तों में एंबुलेंस और दमकल वाहनों की नो-एंट्री, अब होगी मैपिंग