सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कवरेज से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि बीमा कंपनी के अधिकारी का वादा अपने आप कंपनी को बाध्य नहीं करता। अधिकारी मौजूदा बीमा पॉलिसी को संचालित या समझाने के लिए अधिकृत हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह कंपनी के जोखिम का दायरा बढ़ा सकता है। अधिकारी वैधानिक शर्तों को दरकिनार कर बीमा जोखिम को लागू करने का अधिकार भी नहीं रखता। अदालत ने बीमा जोखिम के प्रभावी होने के लिए निर्धारित कानूनी आवश्यकताओं को महत्वपूर्ण माना। फैसले में प्रीमियम भुगतान से जुड़े प्रावधानों पर भी जोर दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना प्रीमियम के बीमा कवरेज बढ़ाने का वादा कानूनन प्रभावी नहीं माना जा सकता। बीमा जोखिम को पिछली तारीख से लागू करने की अनुमति भी नहीं दी जा सकती। यह फैसला बीमा अनुबंधों में वैधानिक शर्तों के महत्व को रेखांकित करता है। अदालत ने अधिकारी की प्रशासनिक भूमिका और कंपनी के जोखिम को बढ़ाने के अधिकार के बीच अंतर स्पष्ट किया। निर्णय बीमा कंपनियों और पॉलिसीधारकों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी मार्गदर्शन प्रदान करता है। Source: Source Post navigation महाराष्ट्र में कैब-ऑटो ड्राइवरों के लिए मराठी नियम को बॉम्बे HC में चुनौती, लागू करने पर रोक की मांग बिलासपुर एयरपोर्ट का संचालन AAI को सौंपने का प्रस्ताव, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जल्द फैसला लेने के दिए निर्देश