सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि बैंक केवल कथित पेशेवर लापरवाही के आधार पर अधिवक्ताओं को IBA Caution List में शामिल कर ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकते। न्यायालय के अनुसार ऐसी कार्रवाई भारतीय रिजर्व बैंक के नियामकीय दायरे से बाहर है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिवक्ताओं के पेशेवर आचरण की जांच करने का अधिकार केवल बार काउंसिल के पास है। अदालत ने माना कि बैंकों की ऐसी कार्रवाई वकीलों के खिलाफ अनुशासनात्मक अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर सकती है। भारतीय बैंक संघ की चेतावनी सूची में नाम शामिल करने से वकीलों की पेशेवर प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है। इसलिए इस तरह के मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है। फैसले से अधिवक्ताओं के अधिकारों और पेशेवर स्वतंत्रता को मजबूती मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बैंक अपनी नियामकीय सीमाओं के भीतर ही कदम उठा सकते हैं। यह निर्णय बैंकिंग क्षेत्र और कानूनी पेशे से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Source: Source Post navigation दिल्ली के रोहिणी में निर्माणाधीन इमारतें गिरीं, मलबे से दो लोग जिंदा निकाले गए; एक की मौत मानसून ने पूरे देश को किया तरबतर, भारी बारिश से जलभराव, जाम और तबाही के कई वीडियो सामने आए