साल 1923 में, ग्वालियर की धरती पर एक अद्भुत दृश्य उभरा—भारी धातु के पहियों वाले विशाल मोटर कारवाँ, जो उस समय की तकनीकी क्षमताओं का प्रतीक थे। महाराजा जयवर्लाल सिंह द्वारा आयोजित इस महा-संग्राम में पाँच बेजोड़ मोटर कारवाँ, प्रत्येक में दो‑तीन टन का कोयला और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आवश्यक सामान ले कर आए। ये कारवाँ न केवल रेलमार्ग की बाधाओं को पार कर तेज़ी से पहुँचे, बल्कि स्थानीय कारीगरों को नई मशीनरी और उपकरण भी प्रदान किए। तब के नागरिक इन कारवाँ को “इंजीनियरिंग का चमत्कार” कहकर सराहते थे, क्योंकि इसने ग्वालियर के उद्योगिक विकास में नई दिशा दी। कारवाँ का मार्ग, अंतर्राष्ट्रीय कारखानों से आयातित उपकरणों, और महाराजा के दूरदर्शी समर्थन ने इस क्षेत्र को आधुनिकता की ओर अडिग कदम बढ़ाने में मदद की। आज भी, इन मोटर कारवाँ की कहानी ग्वालियर के इतिहास में गर्व का प्रतीक बनी हुई है, जो उन सुनहरी यादों को जीवंत करती है जो एक सदी पहले शुरू हुई थी। Post navigation नागपट्टिनम के 13 मछुआरे समुद्र में हमला, पकड़े गए एक संदिग्ध श्रीलंकाई मछुआरे को मत्स्य विभाग को सौंपा राजस्थान रॉयल्स के नए मालिक: स्टील किंग लक्ष्मी मित्तल, 15,000 करोड़ की बडि सौदा