बुधवार को, लखनऊ के सिविल अस्पताल में 8 साल की दौरान जुड़े प्रतीक यादव का निधन हुआ. उन्होंने स्वयं का डिप्रेशन महसूस किया था और इलाज चल रहा था. निधन से पहले, प्रतीक की नसों का भी इलाज मेदांता में था. प्रतीक और अपर्णा की बहुत ही युवावस्था से शुरू हुई रिलेशन ने उनकी मित्रता को जल्दी-जल्दी इकट्ठा कर लिया. 8 साल बाद, आगे चलने वाली रिलेशन पर विचारों में एक नई शैली में उड़ाव-उड़ाव की गई. अपर्णा और प्रतीक के बीच अब शादी सुनिश्चित हो गई, जिससे उनकी रिलेशन की महत्वपूर्णता और भव्यता प्रकट हुई. प्रतीक ने स्वयं को डिप्रेशन में पड़ने से चुनौतियों में उतरा. इलाज और रिलेशन का दबाव में होकर, अपर्णा ने प्रतीक सहायता की. आज, प्रतीक की बातों में जितना भी दुःख है, उसमें खुशबू रही अपर्णा की शिकायत थी. लेकिन इस प्रकार दोनों ने अपनी जीवन-कला में समृद्धि और सुधार ब्रह्मचित की. इस शादी ने प्रतीक और अपर्णा को एक-एक दूसरें के हमलों में रिहाई दी. सुनहरी जुबगियों की शृंखला में उन्होंने अपनी बच्चें-बेटियों को प्रशिक्षण दिया. संगत जीवन-कला में वे तारिक और आइकट नहीं हुए, बल्कि एक अदभुत प्रकृति को दर्शाते थे. उनकी लव लाइफ में आंशिक डिप्रेशन का सामना करने और फिर इस पर नई मुद्दों में चलकर एक अच्छी शादी के बाद हमलों में सफलता दिखाई. इस रिलेशन की उन्नति, डिप्रेशन से कदम-बढ़ाने के पुरुषत्व और अपर्णा की सहयोगशीलता से लेकर उनकी दुविधाओं और आधुनिक समस्याओं का समावेश है. इस रिलेशन में अपर्णा ने प्रतीक को तर्क, सहयोग और छुटकारा दिया जिससे उन्होंने डिप्रेशन में चुनौतियों का सामना किया और अपनी जीवन-कला में सफल बना हुआ. 🔗 Read original source — Aaj Tak Post navigation 3 बच्चों के पिता हैं मुनव्वर, दिखाई नन्ही बेटी की झलक, रिवील किया नाम करोड़ों लुटाए, रन फिर भी नहीं आए! IPL का सबसे महंगा ‘अनफिनिश्ड प्रोजेक्ट’