सुकमा नक्सल प्रभावित जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले छात्र-छात्राएं अब न केवल अपने अंचल से बाहर निकल रहे हैं, बल्कि दूसरे राज्यों की उन्नत कला, शिक्षा और संस्कृति को समझने के लिए बड़े टूर पर जा रहे हैं। कभी घोर नक्सल हिंसा और सीमित संसाधनों के कारण बाहरी दुनिया को केवल कल्पना में देखने वाले इन आदिवासी युवाओं के लिए हिमाचल प्रदेश की यह शैक्षिक एवं सांस्कृतिक यात्रा बड़ा परिवर्तनकारी अनुभव बनकर सामने आई। जिला प्रशासन की इस पहल के तहत सुकमा के सुदूर वनांचल से 22 सदस्यीय दल को हिमाचल भेजा गया था, जिसमें 10 छात्र, 10 छात्राएं और 2 मार्गदर्शक शिक्षक शामिल थे। यह दल कांगड़ा जिले के बीरगांव में आयोजित राष्ट्रीय युवा उत्सव में शामिल होकर अब सुरक्षित वापस लौट आया है। टूर पर जाने वाले छात्रों ने सुकमा लौटकर बताया कि हिंसा और दहशत के उस पुराने दौर में बस्तर या छत्तीसगढ़ से बाहर निकलना दूर का सपना था। 31 मार्च के बाद से हमारे गांवों में तेजी से व्यवस्था बदल रही है और विकास की वजह से ही आज हमें देश दुनिया को अपनी आंखों से देखने का यह शानदार मौका मिला है। यात्रा में युवाओं ने हिमाचल की खूबसूरत वादियों को भी बहुत करीब से महसूस किया। कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि बच्चों के दिमाग से नक्सली हिंसा की पुरानी यादों और सालों पुराने भय के वातावरण को पूरी तरह बाहर निकालने में इस तरह के शैक्षणिक टूर बेहद उपयोगी साबित होंगे। हिमाचल की वादियों में आयोजित एडवेंचर स्पोर्ट्स और कठिन ट्रैकिंग जैसे अनुभवों ने बस्तर के इन बच्चों के आत्मविश्वास, मानसिक दृढ़ता और सामूहिक टीम भावना को और मजबूत करने का काम किया है। इस विशेष कार्यक्रम का सबसे खूबसूरत पहलू सांस्कृतिक आदान-प्रदान रहा, जहां सुकमा के आदिवासी बच्चों और हिमाचल के पहाड़ी युवाओं ने एक-दूसरे की लोक परंपराओं, पारंपरिक खान-पान, वेशभूषा और रीति-रिवाजों को खुलकर साझा किया। बच्चों ने बताया कि इस मंच से उन्हें यह समझ में आया कि अन्य राज्यों के लोग शिक्षा के दम पर कैसे आगे बढ़ रहे हैं। इस प्रगति को छूने के लिए हमारा शिक्षित होना सबसे ज्यादा जरूरी है। दशकों तक हमारी कई पीढ़ियां शिक्षा से महरूम रहीं, जिससे हमारे गांव पिछड़े रह गए, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। : Source Post navigation गौ रक्षा के नाम पर गुंडागर्दी का आरोप, रोक लगाने प्रदर्शन, ज्ञापन अरनपुर, पेरपा में है बांस का बड़ा भंडार