समुद्री नियंत्रण को हथियार बनाकर दुश्मन की सप्लाई काटना और उसे आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना, इतिहास की सबसे पुरानी युद्ध तकनीकों में से एक है। आज भी यह रणनीति बड़ी शक्ति के हाथों में प्रभावी बनी हुई है। 1980‑की दशक में इराक‑ईरान युद्ध में फौजी जहाजों ने फारसी गल्फ में नाकाबंदी की, जबकि 1990‑की दशक में अमेरिकी नौसेना ने इराक पर गलीफ़ वार्मिंग के दौरान एक बड़े पैमाने पर ब्लॉकेड लागू किया। 2016 में, सौदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने इराकी तेल निर्यात को रोकने के लिये हॉर्मुज जलडमरूमध्य को नाकाबंदी कर दी, जिससे तेल की कीमतों में उछाल आया। इसी तरह 2015‑2020 के बीच इरानी‑नियंत्रित यमन में सऊदी‑समर्थित गठबंधन ने यमन के समुद्री रास्तों को बंद कर दिया, जिससे मानवीय संकट बढ़ा। 2021 में, इज़राइल ने गैज़ा की जल सीमा पर कड़ाई से प्रतिबंध लागू किया, जिससे क्षेत्रीय तनाव फिर से बढ़ गया। इन सभी मामलों में समुद्री नाकाबंदी ने केवल आर्थिक दबाव नहीं, बल्कि राजनीतिक एवं सैन्य मोर्चे पर भी बड़े परिवर्तन लाए हैं। Post navigation पंजाब में बदला मौसम: गरज-चमक की झमाझम बारिश ने दिया गर्मी से राहत भवानी में फर्जी एनकाउंटर केस पर भारत मुक्ति मोर्चा ने किया राष्ट्रपती को ज्ञापन भेजना