पंचकूला की विशेष CBI अदालत ने CGST रोहतक के सुपरिटेंडेंट रोहित शर्मा की डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी है। मामला 35 लाख रुपये की कथित रिश्वत मांगने से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार और मजबूत संदेह मौजूद है। शिकायतकर्ता नरेश कुमार ने आरोप लगाया था कि रोहित शर्मा ने 35 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। आरोप है कि यह रकम एक GST फर्जीवाड़े के मामले में कुछ लोगों को कार्रवाई से बचाने के बदले मांगी गई थी। शिकायत के अनुसार, विभाग ने नरेश के दोस्त गौरव कुमार को करीब 100 करोड़ रुपये के कथित GST फर्जीवाड़े में गिरफ्तार किया था। आरोप है कि रोहित शर्मा ने गौरव के भाइयों को मामले में फंसाने की धमकी दी थी। CBI ने शिकायत के बाद नरेश और रोहित के बीच हुई फोन बातचीत रिकॉर्ड की थी। रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर 30 लाख रुपये में मामला तय करने और दो किस्तों में भुगतान की बात सामने आई। हालांकि, आरोपी को CBI में शिकायत की भनक लगने के बाद रिश्वत का ट्रैप सफल नहीं हो सका। FSL जांच में फोन पर हुई ऑडियो रिकॉर्डिंग को सही पाया गया है। अदालत के फैसले के बाद CBI अब रोहित शर्मा के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। Source: Source Post navigation फर्जी ITC मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की बड़ी कार्रवाई, फरीदाबाद समेत 3 शहरों में 9 ठिकानों पर छापे आरक्षण विरोधी टिप्पणी के मामले में यूट्यूबर अजीत भारती पर SC-ST एक्ट के तहत केस दर्ज