छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक कैदी की अपील में देरी के मामले में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने नौ साल से जेल में बंद आरोपी की अपील पर सुनवाई के दौरान लीगल एड वकील बीपी राव को हटा दिया। चीफ जस्टिस की पीठ ने वकील के कामकाज में लापरवाही को लेकर नाराजगी जताई। कोर्ट ने मामले की पैरवी के लिए नया अमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। अदालत ने विधिक सहायता व्यवस्था की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने लीगल एड कमेटी को भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। मामले में कैदी की अपील लंबे समय से लंबित थी। कोर्ट ने कहा कि न्याय पाने का अधिकार हर व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है। विधिक सहायता उपलब्ध कराने में देरी से न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है। हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ काम करने की हिदायत दी है। इस फैसले के बाद लीगल एड व्यवस्था की निगरानी और कार्यप्रणाली पर चर्चा शुरू हो गई है।

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