गुरिंदरवीर सिंह ने राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा और भारतीय स्प्रिंटर्स को पीछे खींचती सोच को गलत साबित किया. उन्होंने 13 साल की उम्र में कोचों की सलाह को नकारा और 100 मीटर दौड़ने का फैसला किया. गुरिंदरवीर सिंह ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया. mereka ने साबित किया कि भारतीय स्प्रिंटर्स भी दुनिया भर में अपना लोहा मनवा सकते हैं. गुरिंदरवीर सिंह की इस उपलब्धि ने देश को गर्व महसूस कराया है. उनकी इस जीत ने भारतीय खेल जगत में नए युग की शुरुआत की है. गुरिंदरवीर सिंह का यह रिकॉर्ड आने वाले समय में प्रेरणा का स्रोत बनेगा. गुरिंदरवीर सिंह की इस उपलब्धि का जश्न पूरा देश मना रहा है. Source: Source Post navigation राजनांदगांव को शतरंज हब बनाने की नई पहल बेंग्ल्स को मिल सकता है 26 मिलियन डॉलर का डिफेंसिव स्टार