पिछले पाँच दशकों में भारत के दक्षिणी भाग में स्थित कोरोमंडेल बेल्ट ने अपनी भूजल साठा से कई लाखों लोगों को सशक्त किया है। 1970 के दशक में वैज्ञानिक सर्वेक्षणों ने इस क्षेत्र में गहरी खनिजीय संरचनाओं के कारण अत्यधिक जलभरण की संभावना बताई थी। तब से निरंतर ड्रिलिंग, पुनरुद्धार परियोजनाएँ और सुदृढ़ जल प्रबंधन नीतियों ने इस संभावनाओं को वास्तविकता में बदल दिया। आज, इस बेल्ट के कई गाँवों में जलस्तर वर्षा के मौसम में भी स्थिर रहता है, जिससे कृषि, उद्योग और घर के उपयोग में स्थायी जल आपूर्ति सुनिश्चित होती है। हालांकि, शहरीकरण और अतिप्रवाह के कारण जल स्तर में गिरावट की चेतावनी भी मिल रही है। इसलिए, सतत जल उपयोग, पुनःसंचयन और जल संरक्षण के उपायों को अपनाना अति आवश्यक है, ताकि इस प्राकृतिक धरोहर को भविष्य की पीढ़ियों के लिये सुरक्षित रखा जा सके। Post navigation बेंगलुरु में महिला ने डिलीवरी एजेंट से शारीरिक और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया तमिलनाडु ने फिर दिखाया दो अंकों की आर्थिक उछाल