भू भारत अधिनियम के लागू होने को एक साल हो गया, लेकिन भूमि लेन‑देन में जटिलता, दस्तावेजी बाधाएँ और अनियमितताएँ अभी भी किसानों को परेशानी में डाल रही हैं। अधिनियम के बावजूद कई किसान अपने खेतों की खरीद‑बिक्री, किराए‑दर एवं वसीयत संबंधी कार्यों में लंबी देरी और अतिरिक्त खर्चे का सामना कर रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए नियुक्त कृषक आयोग ने किसान‑दृष्टिकोण से कई सुधार प्रस्तावित किए हैं। आयोग ने कहा कि शिकायत निवारण प्रणाली को डिजिटल बनाकर 24‑घंटे की पोर्टल, सरल फॉर्म और स्थानीय स्तर पर सहायता केंद्र स्थापित करने चाहिए। साथ ही, भूमि विवादों में शीघ्र समाधान के लिए स्वतंत्र मध्यस्थता बोर्ड और नियत समय सीमा तय की जानी चाहिए। यदि सरकार इन सुझावों को अपनाती है, तो न केवल लेन‑देन की गति बढ़ेगी, बल्कि किसानों का भरोसा भी बहाल होगा, जिससे ग्रामीण आर्थिक विकास को नया impulso मिलेगा। Post navigation पंजाब के बटाला में दो लोगों की गोली मारकर हत्या, एक घायल भारत के डिजिटल सार्वजनिक वर्ग में घुटी कसना