भारत में कपास की खेती में पिछले पांच साल में 20 लाख हेक्टेयर की कमी आई है, जिससे उत्पादन और किसानों की आय पर बुरा असर पड़ा है. तकनीकी पिछड़ापन, गुलाबी सुंडी की बढ़ती समस्या, कम कीमतें और नीतिगत चुनौतियां इस गिरावट के मुख्य कारण हैं.