छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के संबलपुरी गांव के अजय गुप्ता ने भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा में 91वीं रैंक हासिल कर एक अद्भुत सफलता का रास्ता बनाया है। उनकी कहानी ऐसे युवाओं के लिए प्रेरणा है जो गरीबी और संघर्ष के बीच शिक्षा के प्रति लगाव बनाए रखते हैं। अजय ने जंगलों में तेंदूपत्ता इकट्ठा करके अपने परिवार का गुजारा करते हुए भी पढ़ाई जारी रखी। इस उपलब्धि के साथ ही वे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का प्रतीक बन गए हैं।

अजय गुप्ता का जन्म संबलपुरी गांव में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता की मौत के बाद परिवार के आर्थिक दबाव में वे जंगलों में तेंदूपत्ता इकट्ठा करने लगे। इस दौरान भी उन्होंने अपने शिक्षा के लक्ष्य को नहीं छोड़ा। रात के समय पढ़ाई करने के लिए वे दीपक या टॉर्च का उपयोग करते थे। उनके प्रयासों के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग और फिर IFS परीक्षा में सफलता हासिल की।

अजय की सफलता पर छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें सम्मानित किया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन्हें फोन करके बधाई दी और कहा कि ऐसे उदाहरण से राज्य के युवाओं को प्रेरणा मिलेगी। स्थानीय लोगों ने उनके गांव में एक समारोह आयोजित कर उनका स्वागत किया। अजय का कहना है कि वे वन संरक्षण के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं और छत्तीसगढ़ के जंगलों की रक्षा में अपना योगदान देंगे।

इस सफलता के बाद छत्तीसगढ़ में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है। विभिन्न गांवों में युवाओं के लिए शिक्षा कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। अजय की कहानी दिखाती है कि आर्थिक संकट के बावजूद शिक्षा के माध्यम से समाज में उन्नति संभव है। इसके अलावा, उनकी उपलब्धि ने राज्य के युवाओं के लिए नए सपने जगाए हैं।

अजय गुप्ता ने अपने परिवार के लिए एक नई उम्मीद का आधार बनाया है। उनके गांव में अब बच्चों के लिए शिक्षा के बारे में बातचीत अधिक हो रही है। उनके जैसे युवा छत्तीसगढ़ के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अब वे भारतीय वन सेवा में अपने कार्यकाल के शुरुआती चरण में हैं और अपने जंगली इलाके के अनुभव का उपयोग करते हुए वन संरक्षण के कार्यों में लगे हुए हैं।