कर्ट वॉर्नर की जिंदगी संघर्ष, धैर्य और मेहनत की मिसाल है। 1994 में ग्रीन बे पैकर्स द्वारा टीम से बाहर किए जाने के बाद उन्होंने 5.50 डॉलर प्रति घंटे की नौकरी करते हुए किराना स्टोर में सामान सजाया। इस कठिन दौर में भी उन्होंने अपने फुटबॉल सपने को नहीं छोड़ा। बाद में उन्होंने एरिना फुटबॉल लीग में अपने खेल को निखारा। इसके बाद उन्हें सेंट लुइस रैम्स के साथ खेलने का मौका मिला। यहीं से उनके शानदार करियर की शुरुआत हुई। उन्होंने टीम को सुपर बाउल जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी सफलता ने उन्हें एनएफएल के महान खिलाड़ियों में शामिल कर दिया। कर्ट वॉर्नर को बाद में प्रो फुटबॉल हॉल ऑफ फेम में भी जगह मिली। उनका सफर साबित करता है कि असफलता अंत नहीं होती। दृढ़ संकल्प और लगातार मेहनत किसी भी व्यक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।

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