छत्तीसगढ़ में हाल के वर्षों में कई ऐसे सीरियल किलिंग के मामले सामने आए हैं जिन्होंने समाज को झकझोर कर रख दिया है। इन मामलों में अरुण चंद्राकर ने संपत्ति के लालच में अपने ही परिवार के 7 लोगों को जिंदा दफना दिया था। वहीं, रायपुर के उदयन दास ने माता-पिता के कंकाल घर में छिपाकर अपनी प्रेमिका की हत्या की और उसके शव के ऊपर ही सोता रहा। धमतरी के जितेंद्र ध्रुव ने चोरी और रेप की नीयत से 11 महीने में 5 लोगों की हत्या कर दहशत फैला दी थी। इसके अलावा, सुखवंत साहू ने तांत्रिक बनकर गंगाजल में साइनाइड मिलाकर दो लोगों को मौत के घाट उतार दिया। बलौदाबाजार के तेजराम पटेल ने चार साल तक गूंगा-बहरा होने का ढोंग रचा और शारीरिक संबंध बनाने से मना करने पर दो महिलाओं की हत्या कर दी। ये अपराधी अपनी सामान्य जीवनशैली के पीछे क्रूरता छिपाए रखते थे। पुलिस की जांच में इनके अपराधों के पीछे गहरी साजिश और सनक उजागर हुई। इन मामलों ने छत्तीसगढ़ के सुरक्षा तंत्र और सामाजिक सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये खौफनाक कहानियाँ बताती हैं कि कई बार एक साधारण दिखने वाला व्यक्ति भी कितना खतरनाक हो सकता है।

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