भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने नए सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण किया है। परीक्षण के दौरान इंजन ने 175 टन थ्रस्ट उत्पन्न कर अपनी क्षमता साबित की। यह उपलब्धि अधिक शक्तिशाली LVM-3 रॉकेट के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नए इंजन से भविष्य के प्रक्षेपणों में पेलोड क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। परीक्षण के दौरान इंजन के उन्नत टर्बोपंप ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस तकनीक से भारी उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजना अधिक आसान होगा। यह विकास भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई मजबूती प्रदान करेगा। साथ ही व्यावसायिक प्रक्षेपण सेवाओं में भी देश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। इसरो लगातार अगली पीढ़ी की प्रक्षेपण तकनीकों पर काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण भविष्य के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियानों के लिए अहम आधार बनेगा। इस उपलब्धि से भारत की वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है। Source: Source Post navigation लद्दाख में पर्यटकों पर कड़ी कार्रवाई: पैंगोंग झील में अवैध ऑफ-रोडिंग और वन्यजीवों को परेशान करने पर लगा 2 लाख का जुर्माना मालवण में स्विमिंग पूल हादसा: दोस्तों के साथ छुट्टियां मनाने गए युवक की एक गलती से मौत