सरकार के मुख्यमंत्री ने पेट्रोल और डीजल के संयमित और सीमित उपयोग का अहम्मक बताया है. इस नीति का प्रश्न है कि एक संवेदनशील समुदाय को अपने संसाधनों की रक्षा करने के लिए इसे कैसे प्रत्याशित किया जाना चाहिए. मोदी ने विधायी कार्यक्रम में भी इन संपर्कों को बहुत ही गहराई से देखा है. वह पेट्रोल और डीजल के संयमित उपयोग में अनुभव की क्षमताओं का विकास करने के लिए नौकरी प्रदान करने का प्रस्ताव रखा है. यह न केवल अपने संवेदनशील आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास है, बल्कि जीवन की महत्वपूर्ण संसाधनों के अधिक सुरक्षित उपयोग और संरक्षण भी शामिल है. यदि हम इसे नेता मोदी की एक सार्वभौमिक नीति का प्रदर्शन देखते हैं, तो उनकी कांग्रेस के बाला-वला संप्रदाय सहयोग में भी इस प्रोग्राम का अभिन्न हिस्सा बना रहा है.

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