आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने हिमालयी क्षेत्रों के लिए भूस्खलन की अग्रिम चेतावनी प्रणाली विकसित की है। यह प्रणाली वर्षा के आंकड़ों और मशीन लर्निंग तकनीक का उपयोग कर संभावित भूस्खलन का पूर्वानुमान लगाती है। इसके माध्यम से संबंधित अधिकारियों को प्रतिदिन वेब-आधारित प्लेटफॉर्म पर चेतावनी उपलब्ध कराई जाती है। यह प्रणाली पूरे भारतीय हिमालयी क्षेत्र को कवर करती है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समय रहते सतर्कता बढ़ाना है। समय पर चेतावनी मिलने से जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। यह तकनीक आपदा प्रबंधन एजेंसियों को बेहतर निर्णय लेने में भी सहायक होगी। शोधकर्ताओं का मानना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से भूस्खलन जैसी आपदाओं के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह पहल आपदा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। Source: Source Post navigation ओडिशा में राष्ट्रीय डीप-सी फिशिंग परमिट सिस्टम लॉन्च, सतत समुद्री मछली पकड़ने को मिलेगा बढ़ावा पश्चिम बंगाल में उफनती नदी पार करते समय पलटी यात्री बस, स्थानीय लोगों ने सुरक्षित निकाले यात्री