अमरनाथ यात्रा शुरू होने के महज पांच दिनों के भीतर पवित्र हिमलिंग का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पिघल चुका है, जिसने पर्यावरणविदों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान और अत्यधिक भीड़ के कारण हिमलिंग का आकार तेजी से घट रहा है। पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती और कांग्रेस ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन से मामले की जांच की मांग की है। सर्वोच्च न्यायालय ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रतिदिन 10,000 भक्तों की सीमा निर्धारित की है। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में श्रद्धालु बिना पंजीकरण के ही यात्रा मार्ग पर पहुँच रहे हैं, जिससे भीड़ का दबाव बढ़ गया है। बिना पंजीकरण के यात्रियों की बढ़ती संख्या से व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ रहा है। पर्यावरण संरक्षण के जानकारों का कहना है कि हिमालय का नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र मानवीय हस्तक्षेप से प्रभावित हो रहा है। प्रशासन अब भीड़ को नियंत्रित करने और शिवलिंग को सुरक्षित रखने के लिए नए सुरक्षा उपायों पर विचार कर रहा है। यह घटना ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के व्यापक खतरे की ओर भी इशारा करती है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अब व्यापक चर्चा और ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। Source: Source Post navigation वायनाड भूस्खलन के बाद पश्चिमी घाट में विकास परियोजनाओं पर फिर छिड़ी बहस अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा गणना के लिए सख्त नियम: अब जेब वाले कपड़े पहनना मना, बदला दान प्रबंधन सिस्टम