पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव आयुक्त मनोज अग्रवाल को सूबे का नया चीफ सेक्रेटरी किया गया है, जिससे ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस ऐतराज उठाए. वे आरोप लगाकर कहते हैं कि अफसर ने राज्य में पक्षपात किया हुआ SIR करवाया, तथा इसलिए उसे ऐसा महत्वपूर्ण अधिकार दिया जाने से भय था. लेकिन, इस विवाद की गहना राजनीतिक शक्ति-प्रदर्शन में खोजी जा सकती है. बंगाल की पार्टी-शुल्क अवधि के दौरान, उस परिस्थिति में राजनीतिक प्रतियोगिता और समाज के वातावरण में गहराई लगाई जा सकती है. पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव आयुक्त मनोज अग्रवाल ने राज्य के पहले राष्ट्रीय सेवा कर्मियों बँक (SIR) के चांसलर में चुनाव है, और इस निर्णय पर दोनों पार्टी-शुल्क समुदायों का विशाल ऐतराज उठाया. ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस ने राज्य सरकार पर आरोप लगाकर कहा है कि अग्रवाल ने राज्य में पक्षपात किया हुआ SIR करवाया, और इसलिए उसे ऐसी महत्वपूर्ण अधिकारों में अवलंबन लिया जाने से भय था. इस विवाद का मुख्य पहलू राजनीतिक शक्ति-प्रदर्शन होता है. कांग्रेस और बंगाल गणतंय पार्टी के दोनों महत्वपूर्ण समुदायों ने ऐतराज उठाए हैं, क्योंकि वे अग्रवाल की पक्षपातिता से आश्चर्यचकित हैं. ममता बनर्जी ने कहा है कि राज्य में एक ऐसे अफसर को इतना पद सौंपा गया, जिसकी पक्षपातता सबकुछ चाहिए. वह बताया है कि अग्रवाल ने कभी-कभी SIR में दाम दी है, जो इसलिए उन्हें ऐतराज पैदा कर रही है. 🔗 Read original source — Aaj Tak Post navigation क्या गारंटी कि पेपर… NEET मामले पर अखिलेश का सरकार पर निशाना मनोज अग्रवाल विवाद: बंगाल में ‘निष्पक्ष’ और ‘पक्षपाती’ अफसर कौन?